श्वेता भारती की प्रेरणादायक सफलता की कहानी

बिहार के नालंदा जिले के राजगीर की रहने वाली श्वेता भारती आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत सच्ची हो, तो किसी भी कठिन परिस्थिति में सफलता हासिल की जा सकती है।

साधारण परिवार से आने वाले श्वेता की स्कूलिंग पटना के ईशान इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल से हुई है। श्वेता भारती ने भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से Electrical and Telecommunication इंजीनियरिंग में B.Tech की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्हें देश की प्रसिद्ध आईटी कंपनी विप्रो (Wipro) में नौकरी मिल गई। उनकी नौकरी आसान नहीं थी। उन्हें हर दिन लगभग 9 से 12 घंटे काम करना पड़ता था। इसके बावजूद उनके मन में बचपन से एक ही सपना था—आईएएस अधिकारी बनकर देश और समाज की सेवा करना।

परिवार की जिम्मेदारियों के कारण वे अपनी नौकरी छोड़ नहीं सकती थीं। इसलिए उन्होंने नौकरी के साथ ही UPSC की तैयारी करने का कठिन फैसला लिया। वे सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करती थीं और रात को नौकरी से लौटने के बाद भी कई घंटे पढ़ती थीं।

श्वेता जानती थीं कि UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफल होने के लिए पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगाना जरूरी है। इसलिए उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली। उन्होंने अपना स्मार्टफोन इस्तेमाल करना भी लगभग छोड़ दिया, ताकि पढ़ाई के दौरान उनका ध्यान भटक न सके। उन्होंने दोस्तों और सामाजिक कार्यक्रमों में जाना भी कम कर दिया और अपना अधिकांश समय केवल पढ़ाई को समर्पित कर दिया।

उनकी मेहनत का पहला बड़ा परिणाम तब मिला, जब उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 64वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण की। इस परीक्षा में उन्होंने शानदार रैंक हासिल की और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (District Program Officer) के पद पर नियुक्त हुईं। लेकिन उनका सपना अभी पूरा नहीं हुआ था। उनका अंतिम लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयन था।

उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी। लगातार मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2021 अपने दूसरे प्रयास में पास कर ली। इस परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 356 प्राप्त की और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चयनित हुईं।

श्वेता भारती की कहानी हमें यह सिखाती है कि सफलता पाने के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि अनुशासन, समय का सही उपयोग, धैर्य और लगातार मेहनत भी उतनी ही जरूरी है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और व्यक्ति कभी हार न माने, तो सबसे कठिन परिस्थितियों में भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।